VERY HURT TOUCHING STORY PYAR KI DASTAN IN HINDI – रितेश और रौशनी famous love

इश्क आग का दरिया है लेकिन जलने वाले सोचा नहीं करते! VERY HURST TOUCHING STORY PYAR KI DASTAN IN HINDI दोस्तों यह कहानी एक सच्ची कहानी है! यह कहानी कोई मन का वहम नहीं है! कि हम उसे शब्द का रूप दें और मैं आशा करता हूं! कि आपको यह कहानी बेहद पसंद आएगी अगर आपको इस VERY HURT TOUCHING STORY PYAR KI DASTAN IN HINDI के बारे में कुछ राय देना चाहते हैं! तो आप कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकती हैं! 

रितेश और रौशनी की प्यार-VERY HURT TOUCHING STORY PYAR KI DASTAN IN HINDI

रितेश और रोशनी एक ही विद्यालय के एक ही क्लास में साथ- साथ पढ़ते थे जब भी विधालय में एग्जाम या कोई कंपटीशन होता तो दोनों आपस में शर्त लगाते! और उसमें जो फस्ट आता !
 
वह अपने शर्त के अनुसार दूसरे से शर्त का पालन करवाता कभी रितेश फास्ट आता तो कभी रोशनी बाजी मार लेती थी! ऐसा करते- करते वे क्लास फ़र्स्ट से इंटर तक के एग्जाम अच्छे अंकों से उत्तीर्ण करते थे!

 

                                      VERY HURT TOUCHING STORY PYAR KI DASTAN IN HINDI

 

 

अब बारी थी, कॉलेज में प्रवेश लेने की दोनों ने साथ-साथ प्रवेश लिया और फिर वही शर्ते वाली प्रक्रिया चलती रहती थी! कई दिनों से साथ-साथ पढ़ने और भावनाओं में समानता होने के कारण रितेश और रोशनी में गहरी दोस्ती हो गई! दोनों एक दूसरे को दिल से चाहने लगे
 
 
परंतु इनकी दोस्ती ने कभी इनकी पढ़ाई में बाधा बनने का प्रयास नहीं किया अर्थात पढ़ाई की वक्त ये सिर्फ कॉलेज की स्टूडेंट के रूप में रहते थे! धीरे धीरे रितेश और रोशनी की दोस्ती इतनी गहरी हो गई अगर किसी दिन रोशनी कॉलेज नहीं आती तो रितेश बेचैन हो उठता और अगर किसी दिन रितेश कॉलेज नहीं आता! तो रोशनी पूरे दिन खोई खोई रहती थी! 

 

जब दोनो के प्यार से जब जलने लगा था क्लास-

इनकी दोस्ती के गहरे रंग को देखकर कॉलेज के स्टूडेंट इनसे ईर्ष्या करने लगे कई बार उन लोगों ने मिलकर इनकी दोस्ती तुड़वाने का प्रयास भी किया पर सफलता हाथ ना लगी और सफलता हाथ लगती भी तो कैसे इन दोनों की दोस्ती तो विश्वास और संस्कार से बुनी हुई डोर से बॅधी थी !

 

धीरे-धीरे कॉलेज के दिन भी कब गुजर गए पता ही नहीं चला! आज कॉलेज में रिजल्ट आने वाला था! सभी उत्सुकता से अपने-अपने रिजल्ट को जानने के लिए कॉलेज में जमा हो गए थे ऐसे में रोशनी और तेज भी अपनी रिजल्ट के इंतजार में एक कोने में बैठे हुए थे! 
 
इतनी में रोशनी ने रितेश से पूछ लिया कि इस बार किसके अंक अधिक आएंगे! रितेश ने कहा ये तो अभी सामने ही आ जायेगा! ठीक 12:00 बजे परिणाम जारी हुआ और रोशनी और रितेश संयुक्त रुप से कॉलेज में प्रथम स्थान प्राप्त किए! दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी! दोनों खुश नजर आ रहे थे! इतने में रितेश ने कहा अब तो हमारी कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो गई!

दोनों ने खाई कस्मे साथ जीने मरने की-

अब हम फिर कब मिलेंगे इस पर रोशनी ने कहा अब हमें कंपटीशन की तैयारी करनी चाहिए! और किसी अच्छे छेत्र में जॉब पाकर हमेशा के लिए एक हो जाना चाहिए रितेश ने कहा क्या मतलब है! तुम्हारा रोशनी ने का पहले हमें अपने माता पिता के सपनों को साकार करना है
 
उसके बाद उनकी सहमति से हम एक दूसरे से शादी कर लेंगे और हमें पूरा भरोसा है! कि हमारे माता पिता हमारे इस प्रस्ताव को सहष॔ स्वीकार कर लेंगी इसके बाद रोशनी और रितेश अपने-अपने घर आएं कुछ दिन बीते रोशनी कंपटीशन की तैयारी के लिए जयपुर चली गई! 
 
रितेश भी इसी सिलसिले में कोटा चला गया! कुछ दिनों बाद रोशनी शहर से डॉटर बनकटी तो रितेश इंजीनियर बन लौटा किसी बीच रोशनी और देश का कभी मिलन नहीं हुआ! इसके बाद रोशनी को कॉलेज की पुराने दिन याद आई फिर क्या था! 

रोशनी अपनी मां से बताया अपने प्यार के बारे में-

रोशनी अपनी मां से कह दीया कि वह रितेश से शादी करना चाहती हैं! यह बाद रोशनी के पिताजी तक पहुंची तो उन्होंने तुरंत हमी भर दी क्योंकि वह जानते थे! कि रोशनी कभी कोई गलत फैसला नहीं ले सकती! 
 
अगले दिन रोशनी के पिता रितेश के घर अपनी लाडली बेटी का रिश्ता जोड़ने गये रितेश के घर के अंदर पहुंचते ही रोशनी के पिताजी दंग रह गये! घर के अंदर की व्यवस्था को देखकर ऐसा लग रहा था मानो कहीं स्वर्ग में उतर आए हैं!
 
रोशनी के पिताजी मन ही मन बहुत खुश हुए! उन्हें लगने लगा कि उनकी बेटी तो इस घर में अप्सरा बनकर रहेगी! रोशनी के पिताजी एक सामान्य परिवार से थे! हाँ इतना जरूर था! कि रोशनी के डॉक्टर बनने से उनके सम्मान में वृद्धि हुई थी! 
 
इतने में रोशनी के पिता ने देखा कि घर के एक कोने में एक कुर्सी पर चश्मा लगाये नवयुवक बैठकर अखबार पढ़ रहा था! उम्र यही कोई 25 साल के करीब लग रही थी! रोशनी के पिता जी समझ गए कि यह युवक कोई और नहीं बल्कि रितेश है! 

आखिर रितेश शादी करने से इंकार क्यों कर दिया क्यों कर दिया-

 
रोशनी के पिता ने खुद को विश्वास दिलाने के लिए उन से नाम पूछा तो जवाब मिला रितेश अब तो रोशनी के पिता को पूरा विश्वास हो गया! फिर उन्होंने रितेश को सारी बातें बता दी कि मैं रोशनी का पिता हूं! 
 
 
और रोशनी आपसे बहुत प्यार करती है! इतना ही नहीं वह आप से शादी भी करना चाहती है! इसलिए मैं अपनी बेटी की खुशियां मांगने आपके पास आया हूं! रितेश ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया! फिर रोशनी के पिता ने वही बात फिर से दोहराई इस पर रितेश झाला उठा और उसने कहा कि आपने यह सोच भी कैसे लिया कि एक मेजर का बेटा 
 
और वह भी इंजीनियर एक मामूली से किसान की बेटी से शादी कर लेगा! अपनी बेटी रोशनी से कह दो कि कॉलेज की दिनों को सपना समझकर भूल जाये! इतना सुनते ही मानो रोशनी के पिताजी को दिन में ही तारे दिखाई देने लगे वे निराश होकर घर लौट आएं! और सारी बातें रोशनी को बता दिया! 

यह सब सुनकर रोशनी को बहुत दुख हुआ! लेकिन उसने भी ठान लिया कि वह आपने पिता के अपमान का बदला लेकर रहेगी! बस क्या था! अगले ही दिन वह सीधे रितेश के घर पहुंच गई! पहुंचते ही देखा कि रितेश कुर्सी पर बैठ कर चाय पी रहा था! 
 
रोशनी को समझ में आ गया कि जो व्यक्ति उससे मिलने के लिए दौड़ते हुए आता था! आज वो मुझे सामने देखकर भी कुर्सी से उठ तक नहीं रहा है! इसका मतलब कि यह स्वाभिमान के बुत छाया में जी रहा है! इसे अहंकार हो गया है! 

जब प्यार में पड़ा थप्पड़-VERY HURT TOUCHING STORY PYAR KI DASTAN IN HINDI –

फिर रोशनी ने उसे भला बुरा कहना शुरू कर दिया! पर आशचय्र की रितेश यह सब सुनता रहा! यहां तक की रोशनी ने रितेश को खुदगर्ज मक्कार कमीना ना जाने क्या-क्या कह डाला रितेश ने फिर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी फिर भी रोशनी का गुस्सा शांत नहीं हुआ! और उसने रितेश के पास में जाकर उसे जोरदार थप्पड़ जड़ दिया! 

थप्पड़ लगते इस रितेश कुर्सी से लड़खड़ाकर नीचे गिर गया! फिर भी रितेश खामोश रहा! इतने में अंदर से रितेश की माँ आई और कहने लगी बस करो रोशनी बहुत हो गया रितेश तुझे से आज भी उतना ही प्यार करता है! जितना कि पहले किया करता था! पर वह नहीं चाहता था! 
 
कि उसकी वजह से तुम्हारी भी जिंदगी मायूस हो जाए! इसलिए वह तुझसे शादी नहीं करना चाहता ये सब चल ही रहा था! कि अगले पल वाकये को देखकर रोशनी के पैरों तले की जमीन खिसक गई उसने देखा कि उसके दारा लगाए गई चोट से गिरा रितेश बैशखियो के सहारे उठने की कोशिश कर रहा था! 

जब प्यार में दूर हुआ गलतफैमी तो बदल गया आशुओ में-

अब रोशनी को सारी बातें समझ में आ गई थी! कि रितेश उसे क्यों नहीं शादी करना चाहता था! क्योंकि रितेश नहीं चाहता था! कि रोशनी किसी अपाहिज से शादी करें रोशनी का मन दुखों से भर गया आंखों से आसुओं की धारा बह चली और उसी पल उसने रितेश से कहा !

 

बेरहम खुदा ने तुम्हारे पैरों पर सितम करके तुम्हें अपाहिज बना दिया मगर तुम्हारा दिल अब भी वही है! जो पहले था! कहने का मतलब ये है! कि तुम सिर्फ पैर से अपाहिज हो दिल से नहीं इसलिए मैं तुमसे ही शादी करूंगी ऐसा कह कर रोशनी ने उसी पल भगवान को साक्षी मानकर रितेश से शादी कर ली!!!

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